श्री बृजवासी पंडा सभा सन 1915 से लेकर अब तक बृज के प्राचीनतम संगठन रूप में तीर्थ पुरोहितों तथा वृंदावन धाम के हितार्थ कार्य कर रहा है। समय-समय पर इस संगठन में अनेक महापुरुष जनों ने अपना योगदान दिया है ऐसे ही महापुरुषों में एक नाम मदन मोहन बांके जी का है जो वृंदावन में बड़े ही प्रभावशाली व्यक्ति थे। तथा अंग्रेजों के शासन में भी जिनका बोल वाला था। जिनकी कद काठी 7 फुट से भी अधिक थी तथा आप मल्लविद्या में अत्यंत ही निपुण थे। उनके द्वारा वृंदावन में पंचायती गौशाला की स्थापना भी कराई गई और श्री बृजवासी पंडा सभा द्वारा आयोजित होने वाली बृज 84 को परिक्रमा को प्रारंभ करने में भी इनका विशेष योगदान था। इससे पूर्व यह परिक्रमा गौड़िया वैष्णव संत वल्लभ कुल संप्रदाय के गोस्वामियों तथा बृज विदेही महंत काठिया द्वारा कराई जाती थी जिसमें तीर्थ को विशेष सम्मान दिया जाता था किंतु बाद में तीर्थ पुरोहितों की उपेक्षा होने पर उन्होंने इस यात्रा का बहिष्कार कर स्वयं के द्वारा सन 1940 में नवीन यात्रा का आरंभ किया जिसका मथुरा के चतुर्वेदी समाज द्वारा विरोध किया गया था किंतु मदन मोहन बांके के प्रभाव एवं रुतबा के आगे यह विरोध थम गया। श्री मदन मोहन बांके जी ने अपने जीते जी वृंदावन में किसी मस्जिद का निर्माण भी नहीं होने दिया। तदोपरांत श्रीमान रतनलाल पुरोहित जी ने भी पंडा सभा के अध्यक्ष पद पर रहते हुए तीर्थ पुरोहितों के हितार्थ कार्य किया आप अत्यंत ब्राह्मणवादी व्यक्ति थे जो ब्राह्मणों के स्वाभिमान कुछ सर्वोपरि मानते थे एक बार रंगनाथ मंदिर में ब्राह्मण भोज का आयोजन हुआ था जिसमें ब्राह्मणों से पहले संतो को भोजन के लिए बैठाया गया था इस बात से श्रीमान रतनलाल पुरोहित जी अत्यंत नाराज हो गए और उसी समय ब्राह्मणों से उस भोज का बहिष्कार करने के लिए कहा सभी ब्राह्मणों ने उनकी बात मानते हुए उस भोज का बहिष्कार कर दिया तब मंदिर प्रबंधन द्वारा माफी मांगने पर सभी ब्राह्मण भोजन करने के लिए राजी हुए।
तदोपरांत श्रीमान छोटेलाल जी गौतम किस संगठन के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे झुन झुन लाठी साढ़े तीन भाई के नाम से विख्यात थे। आप अत्यंत ही सरस हृदय एवं स्वाभिमानी व्यक्तित्व के धनी थे तथा समस्त तीर्थ परावर्तन के लिए सम्मानित थे उसके बादश्रीमान श्यामलाल शर्मा (सांवरे जी) श्री बृजवासी पंडा सभा के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे। आप बनखंडी क्षेत्र के निवासी थे तथा प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी तथा दबंग व्यक्ति थे जिनकी एक आवाज पर संपूर्ण समाज एकत्रित हो जाया करता था आप सभी तीर्थ पुरोहितों का अत्यंत सम्मान किया करते थे बृज की अन्य तीर्थों के तीर्थ पुरोहित भी आपके यहां छाना घोटी करने के लिए वृंदावन आया करते थे आपका प्रभाव संपूर्ण बृज के तीर्थ पुरोहितों पर था आपने समस्त तीर्थ पुरोहितों को एक धागे में पिरोने का कार्य किया।
इसके उपरांत श्रीमान गजाधर सरदार जी इस संस्था के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे उस समय वृंदावन में ब्राह्मण समाज के अंदर विघटन का माहौल था यह समाज गौतमबाद तथा सन्नाड्यबाद में बटा हुआ था तथा दोनों ही वर्गों में वर्चस्व की लड़ाई थी आपने अपनी सूझबूझ के चलते प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर समाज हित का ताना बाना बुनते हुए इस संस्था को आगे बढ़ाने का कार्य किया।
कालांतर में हर स्वरूप पाठक जी इस संस्था के अध्यक्ष रहे जो वृंदावन की एक प्रभावशाली व्यक्ति थे तथा वृंदावन नगर पालिका के अध्यक्ष पद पर भी सुशोभित रहे उसे समय मथुरा का चतुर्वेदी समाज ब्रिज के अन्य तीर्थ पर्वतों को स्वीकार नहीं करता था तथा स्वयं को ही संपूर्ण ब्रिज का तीर्थ पुरोहित मानता था। आपने संपूर्ण के तीर्थ पुरोहितों को एकत्रित करने के लिए वृंदावन की मिर्जापुर वाली धर्मशाला में सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें बृज के समस्त तीर्थ ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की तथा मथुरा के चतुर्वेदी समाज का बहिष्कार किया इस पर चतुर्वेदी समाज ने गलती को स्वीकार करते हुए ब्रज के अन्य तीर्थ पुरोहितों को भी तीर्थ पुरोहितों के रूप में स्वीकार किया।
हर स्वरूप पाठक जी के उपरांत संतलाल गौतम जी प्रेमलाल गौतम जी व गोखलेश मोती वाले इस संगठन की अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे आप तीनों ही उत्कृष्ट व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे जिनका समाज बहुत सम्मान किया करता था। समस्त तीर्थपुरोहित आपकी बात को गंभीरता के साथ लेकर उसका अनुकरण किया करते थे। बाद में बृजकिशोर शास्त्री जी ने इस संस्था के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया आप भागवत के अत्यंत विद्वान एवं ब्राह्मणवादी व्यक्ति थे आपके लिए ब्राह्मणों का स्वाभिमान ही सर्वोपरि था कालांतर में गोपीनाथ शर्मा एवं बुद्ध से शुक्ला जी द्वारा संस्था के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया गया। बुद्ध सेन शुक्ला के वश में वृंदावन में सबसे प्रथम दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया स्वयं बुद्ध सेन शुक्ला भी दुर्गा पूजा के समय अपने हाथों से दुर्गा मां की प्रतिमा बनाकर नौ दिन तक पूर्ण भाव से उनकी विधिवत पूजा किया करते थे आपकी इस भक्ति से प्रभावित होकर वृंदावन में अन्य स्थानों पर भी दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ हुआ।
कालांतर में श्री मान देवी पंडा जी नत्थो मोहल्लेदार जी व रमेश चंद्र गौतम BKD जैसे व्यक्ति जिनका समाज पर विशेष प्रभाव था उन्होंने इस संस्था की बागडोर को संभालने का कार्य किया। श्रीमान रमेश बीकेडी जी कवि हृदय व्यक्ति थे एवं वृंदावन में स्वांग कला के उस्ताद के रूप में जाने जाते थे। तदोपरान्त महेश चंद्र शर्मा जी संस्था के अध्यक्ष रहे आपके कार्यकाल में तीर्थपुरोहित समाज में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ एवं संपूर्ण समाज को सूचीबद्ध कर परिचय पत्र जारी करने का कार्य किया गया। आपके बाद श्रीमान नंद कुमार पाठक जी ने संस्था की क्रियाकलापों को आगे बढ़ते हुए संस्था को नई पहचान दी।
वर्तमान में श्याम सुंदर गौतम जी इस संस्था के अध्यक्ष हैं आप अपनी सूझबूझ एवं निर्भीक स्वभाव से संस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का कार्य कर रहे हैं वर्तमान में संस्था के सदस्यों को पुनः सूचीबद्ध किया जा रहा है एवं सभी सदस्यों के डिजिटल परिचय पत्र बनाने का कार्य किया जा रहा है जिससे समाज में बाहरी व्यक्तियों द्वारा हो रहे अतिक्रमण को रोककर समाज शुद्धि का कार्य किया जा सके।
यह संपूर्ण जानकारी हमने अपने बुजुर्गों से प्राप्त की है यदि इसमें कोई त्रुटि हो या कुछ छूट रहा हो तो हम उसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।
श्री बृजवासी पंडा सभा की अध्यक्षों की सूची :-
- श्रीमान रतन लाल जी
- श्रीमान गजाधर सरदार जी
- श्रीमान प्रेमलाल गौतम जी
- श्रीमान गोपीनाथ शर्मा जी
- श्रीमान वासुदेव गौतम जी
- श्रीमान महेश चंद्र शर्मा जी
- श्रीमान छोटेलाल गौतम जी
- श्रीमान हर स्वरूप पाठक जी
- श्रीमान गोखलेश मोतीवाले जी
- श्रीमान बुद्धसेन शुक्ला जी
- श्रीमान नत्थो मोहल्लेदार जी
- श्रीमान नंद कुमार पाठक जी
- श्रीमान श्यामलाल उर्फ सांवरे जी
- श्रीमान संतलाल गौतम जी
- श्रीमान ब्रज किशोर शास्त्री जी
- श्रीमान देवी पंडा जी
- श्रीमान रमेश चंद्र गौतम बीकेडी
- श्रीमान श्याम सुंदर गौतम जी (वर्तमान)