श्री वृन्दावन धाम स्वयं ही परम तीर्थ है, जिसके विविध तीर्थ एवं धरोहर उसकी पौराणिक महिमा का गुणगान करती हैं
19-Mar-2026
राघव भारद्वाज
बांके बिहारी मंदिर वृंदावन संगीत सम्राट सनाढ्य कुल भूषण संत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी महाराज द्वारा श्री कुंज बिहारी लाल जी का प्रकृति सन 1567 ई के लगभग वृंदावन के निर्गुण स्थान से हुआ वहीं पर स्वामी
श्री गोकुलानंद मंदिर वृंदावन श्री गोकुलानंद मंदिर वृंदावन में राधा रमन मंदिर जी के बराबर स्थित है जिसकी सेवा पूजा राधा रमण जी की गोस्वामी श्री युत श्री वत्स गोस्वामी जी के द्वारा की जाती है। इस मंद
श्री राधा रमण लाल जी श्री गोपाल भट्ट गोस्वामी द्वारा सेवित ठाकुर हैं जिनका प्राकट्य विक्रम संवत 1599 वैशाख पूर्णिमा को हुआ इनका प्राकट्य स्थल गोपाल भट्ट गोस्वामी जी की समाधि की बगल है ठाकुर श्री राध
एक बार कृष्ण दास नाम के एक संत निधिवन कुंज में सोहनी सेवा कर रहे थे तभी झाड़ू लगाते समय उन्हें एक नूपुर की प्राप्ति हुई यह राधा रानी का दिव्य नूपुर था जो कुंज में विचरण करते समय वहां गिर गया यह नूपुर
श्री राधादामोदर जी का विग्रह श्री जीव गोस्वामी द्वारा सेवित है जिसे उनके गुरु श्री रूप गोस्वामी जी महाराज ने प्रदान किया था जो रिश्ते में श्री जीव गोस्वामी जी के ताऊ अर्थात् पिता के बड़े भाई थे। सवा
मदन मोहन मंदिर,वृंदावन जयतां सुरतौ पंगोर्मम मंद मतेर्गति। मत सर्वस्व पदाम्भोजौ राधा मदन मोहनौ मुझे जैसे लंगड़े एवं मंदबुद्धि वाले की एकमात्र जो गति है एवं जिनके चरण कमल ही मेरे सर्वस्व है ऐसे उन
गोपीनाथ जी मंदिर वृंदावन श्रीमान रास रसारंभी वंशी वट तट स्थित: कर्षण वेणुस्वनैर्गोपी गोपीनाथ: श्रियोअस्तुन: अपनी मुरली की मधुर ध्वनि से गोपियों के मन को आकर्षित करने वाले बंसी वट पर स्
श्री वृंदावन धाम की अधिष्ठात्री देवी श्री वृंदा रानी की कृपा से भगवान श्री कृष्ण वृंदावन में गोविंद रूप में विद्यमान है जो संपूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं श्री गोविंद देव विग्रह में भगवान श्री
18-Mar-2026
श्री धाम वृंदावन का पौराणिक एवं आधुनिक इतिहास जैसा कि कहा जाता है कि 'वृंदावन धाम अपार' वास्तव में इस धाम का महत्व अस्तित्व एवं इतिहास अपार है जिसे जान पाना साधारण जन के लिए अत्यंत कठिन है फिर भी कुछ
Raghav Bhardwaj.
जो विरक्त हैं लौकिकता ते, इच्छुक है कुछ जानन कौ भक्त, जीव - परमार्थी, ज्ञानी, साधक मानें कौ अर्थात जो संसार से कुछ विरक्त है फिर भी जिज्ञासू है वही विरक्त है, परमार्थी जीव है, ज्ञानी है
वृंदावन के तीर्थ पुरोहितों की समस्त जानकारी के साथ वृंदावन के पुरातन महत्व का वर्णन करने वाली एक मात्र विषय वस्तु