Braj Vrindavan mahatwa

Written By Raghav Bhardwaj. Written at 18-Mar-2026
जो विरक्त हैं लौकिकता ते, इच्छुक है कुछ जानन कौ भक्त, जीव - परमार्थी, ज्ञानी, साधक मानें कौ अर्थात जो संसार से कुछ विरक्त है फिर भी जिज्ञासू है वही विरक्त है, परमार्थी जीव है, ज्ञानी है और साधक भी वही है। और साधक रूपी विद्यार्थी के परम लक्ष्य की प्राप्ति हेतु बृज भूमि सर्वोत्तम विश्व विद्यालय है जो जीव की ईश्वर प्राप्ति की मंशा को भगवान की लीला स्थली के इस भूखंड से प्रेम करने पर सहजता से पूर्ण कर देती है। वैसे तो सम्पूर्ण बृज भूमि भगवान प्रिया प्रीतम श्री श्यामश्यामा जु का साक्षात जुगल स्वरूप है,, वंशी वट पर तप करें तों जमुना देत शीष चहुं भूमि गोपाल की कहूं नवावहु शीश लेकिन श्री धाम वृंदावन हमारी राधा रानी का हृदय स्वरूप है, तभी तो भारत भूमि के बड़े बड़े भक्त इस धरा पर आने को लालाहित रहते है। सूर , कबीर, मीरा, रसखान, तुलसी दास, बिहारी लाल , हरिदास जैसे ना जाने कितने भक्तों ने इसे अपने नयनों से चूमा है। वल्लभाचार्य, रामानुजाचार्य, निंबारकाचार्य जैसे कितने आचार्य इस भूमि के प्रेम रहस्य को जानने को आतुर रहे है लेकिन उद्धव जैसे ज्ञानी भी इसके प्रेम रहस्य को समझ ना सके ऊधों सूधों है गयौ सुन गोपिन के बोल ज्ञान बजावें दुम दुमी प्रेम कौ बाजौ डोल। हम आपको इस भूमि के रहस्य से परिचित करा सकें इतनी हम में सामर्थ नहीं किंतु इस पेज के माध्यम से वृंदावन के तीर्थ पुरोहित श्री योगेन्द्र वृजवासी, तीर्थ पुरोहित श्री गिरधारी लाल बृजवासी के ज्ञान सहयोग एवम संत अनुराग जी महाराज ( अनुरागी बाबा ) की प्रेणना से रचित ग्रंथ 'बृज मंडल परिक्रमा' को आधार बनाकर श्री कृष्ण लीला से जुड़े बृज मंडल के पावन स्थलों के पौराणिक एवम आध्यात्मिक महत्व एवम उस स्थल से जुड़ी परंपराओं का दर्शन अवश्य कराने का प्रयास करेंगे। तो आइए हमारे साथ जुड़कर बृज चौरासी कोस की परिक्रमा का आनंद लीजिए.......( आगे अगली पोस्ट में)