श्री बांके बिहारी लाल
संगीत सम्राट सनाढ्य कुल भूषण संत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी महाराज द्वारा श्री कुंज बिहारी लाल जी का प्रकृति सन 1567 ई के लगभग वृंदावन के निर्गुण स्थान से हुआ वहीं पर स्वामी हरिदास जी महाराज अपने लाडले श्री कुंज बिहारी को लड़ लड़ते थे। पूर्व में निर्जीवन में ही बांके बिहारी का मंदिर था जिसे भरतपुर की रानी लक्ष्मीबाई ने बनवाया था इस मंदिर की जिद्षिण हो जाने पर भक्तों ने मिलकर 1921 ईस्वी में बांके बिहारी का नया मंदिर बनवाया और वहां कुंज बिहारी लाल को विराजमान किया गया आज कुंज बिहारी लाल विश्व प्रसिद्ध ठाकुर है हजारों लाखों लोग प्रतिदिन ठाकुर जी के दर्शन करने के लिए वृंदावन आते हैं साल में एक ही दिन जन्माष्टमी को ठाकुर जी की मंगला आरती होती है एवं बंसी और मुकुट धारण करते हैं और एक ही दिन वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया अर्थात अक्षय तृतीया को चरण दर्शन होते हैं।