श्री शाहजी मंदिर
शाह जी मंदिर वृंदावन का एक प्रसिद्ध एवं अति सुंदर महल आकार में बना हुआ मंदिर है जिसे टेड़े खंबे के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है मंदिर में लगे हुए संगमरमर की टेड़े मेड़े खंबे मंदिर की शोभा को बढ़ाते हैं। ऐसे खंबे अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलते हैं।
इस मंदिर का निर्माण दो भाई शाह कुंदन लाल एवं शाह फुंदना लाल जी ने सन 1925 में माघ शुक्ल पंचमी को कराया इन भाइयों को किशोरी अली एवं किशोरी माधुरी के नाम से भी जाना जाता है। जो लखनऊ के नवाब वाजिद अली खान के सचिव थे जाति से अग्रवाल थे एवं उन्हीं बृज बिहारी लाल के पोते थे जिन्होंने वृंदावन में शालिग्राम शिला से प्रकट राधा रमण लाल के मंदिर का निर्माण सन 1883 कराया। एक बार बृज बिहारी लाल जी ने राधा रमण लाल के लिए चांदी का सिंहासन बनवाया था किंतु समयाभाव के कारण स्वयं वृंदावन ना सके इसलिए अपने पोते फुंदन लाल को सिंहासन लेकर वृंदावन भेजा। वृंदावन में फुंदन लाल का मन रम गया और उन्हें वृंदावन वास की इच्छा हुई। कालांतर में अपने भाई कुंदन लाल के साथ वे वृंदावन आ गए जहां उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया तथा अपने आराध्य ठाकुर छोटे राधा रमण लाल जी को विराजित किया तथा सखी भाव में उनकी सेवा की। इस मंदिर में ऋतुराज भवन नाम से एक बसंती कैमरा है इसमें बेस कीमती झाड़ फन्नूस लगे हुए हैं। बसंत पंचमी के दिन ठाकुर छोटे राधा रमन जी उस कमरे में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं मंदिर में अनेक रत्नों से बनी हुई कलाकृतियां भी हैं। नवाब वाजिद अली खान को भी इस मंदिर में पंखा करते हुए दर्शाया गया है।